
स्टॉक एक्सचेंज हर स्टॉक के लिए कीमत की एक सीमा तय कर देते हैं। एक ट्रेडिंग दिन में स्टॉक की कीमत उस सीमा के बाहर नहीं जाने दी जाती है, ना ऊपर की तरफ और ना ही नीचे की तरफ। ऊपरी कीमत की सीमा को अपर सर्किट और कीमत की निचली सीमा को लोअर सर्किट कहते हैं। स्टॉक की सर्किट की सीमा कुछ भी हो सकती है जो एक्सचेंज अपने नियमों के हिसाब से तय करते हैं। एक्सचेंज सर्किट का इस्तेमाल स्टॉक में जरूरत से ज्यादा उतार चढ़ाव को काबू में रखने के लिए करते हैं ताकि किसी खबर की वजह से स्टॉक में बहुत ज्यादा गिरावट या तेजी ना आए। अपर सर्किट (Upper Circuit) और लोअर सर्किट (Lower Circuit) शेयर बाजार में महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र हैं, जो किसी विशेष स्टॉक की कीमत में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन सर्किट ब्रेकर्स का मुख्य उद्देश्य बाजार में स्थिरता बनाए रखना और पैनिक सेलिंग या अत्यधिक खरीदारी से बचाना होता है। आइए इस तंत्र को विस्तार से समझते हैं:
अपर सर्किट (Upper Circuit)
अपर सर्किट वह उच्चतम सीमा होती है, जिसके पार किसी विशेष स्टॉक की कीमत एक ट्रेडिंग दिन में नहीं जा सकती। अगर स्टॉक की कीमत इस सीमा तक पहुँच जाती है, तो उस दिन के लिए उस स्टॉक की ट्रेडिंग बंद हो जाती है।
- सर्किट लिमिट: अगर किसी स्टॉक की अपर सर्किट लिमिट 10% तय की गई है और स्टॉक की वर्तमान कीमत ₹100 है, तो उस दिन स्टॉक की कीमत ₹110 से ऊपर नहीं जा सकती।
- परिस्थिति: अगर स्टॉक की कीमत ₹110 तक पहुँच जाती है, तो ट्रेडिंग अपने आप बंद हो जाती है और उस दिन के लिए कोई और लेन-देन संभव नहीं होता।
लोअर सर्किट (Lower Circuit)
लोअर सर्किट वह न्यूनतम सीमा होती है, जिसके नीचे किसी विशेष स्टॉक की कीमत एक ट्रेडिंग दिन में नहीं जा सकती। अगर स्टॉक की कीमत इस सीमा तक पहुँच जाती है, तो उस दिन के लिए उस स्टॉक की ट्रेडिंग बंद हो जाती है।
- सर्किट लिमिट: अगर किसी स्टॉक की लोअर सर्किट लिमिट 10% तय की गई है और स्टॉक की वर्तमान कीमत ₹100 है, तो उस दिन स्टॉक की कीमत ₹90 से नीचे नहीं जा सकती।
- परिस्थिति: अगर स्टॉक की कीमत ₹90 तक पहुँच जाती है, तो ट्रेडिंग अपने आप बंद हो जाती है और उस दिन के लिए कोई और लेन-देन संभव नहीं होता।
सर्किट लिमिट का निर्धारण
- 2%, 5%, 10%, 20%: स्टॉक एक्सचेंज विभिन्न शेयरों और सूचकांकों के लिए अलग-अलग सर्किट लिमिट निर्धारित करते हैं। यह सीमा कंपनी के मार्केट कैप, शेयर के उतार-चढ़ाव के इतिहास, और बाजार की समग्र स्थिति के आधार पर तय की जाती है।
- नियम और विनियम: प्रत्येक एक्सचेंज (जैसे BSE और NSE) अपने नियमों और विनियमों के अनुसार इन सर्किट ब्रेकर्स को लागू करता है।
सर्किट ब्रेकर का उद्देश्य
- अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना: सर्किट ब्रेकर्स शेयर की कीमत में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए होते हैं, ताकि अचानक आई खबरों या अफवाहों के कारण शेयर की कीमत बहुत अधिक न बढ़े या घटे।
- बाजार की स्थिरता: यह बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है और निवेशकों को पर्याप्त समय देता है ताकि वे समझदारी से निर्णय ले सकें।
- पैनिक से बचाव: पैनिक सेलिंग या अत्यधिक खरीदारी के कारण होने वाली अनिश्चितता और अस्थिरता को रोकना।
सर्किट ब्रेकर के प्रभाव
- ट्रेडिंग का रुकना: अपर सर्किट या लोअर सर्किट पहुँचने पर स्टॉक की ट्रेडिंग बंद हो जाती है, जिससे निवेशकों को स्थिति का आकलन करने और उचित कदम उठाने का समय मिलता है।
- भावनात्मक नियंत्रण: इससे निवेशकों को भावनात्मक रूप से प्रेरित निर्णय लेने से रोका जाता है, जो अक्सर बाजार में उथल-पुथल का कारण बन सकते हैं।
कैसे जानें सर्किट लिमिट
- स्टॉक एक्सचेंज वेबसाइट: BSE और NSE की वेबसाइट पर प्रत्येक स्टॉक की सर्किट लिमिट की जानकारी उपलब्ध होती है।
- ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स: विभिन्न ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स और ट्रेडिंग ऐप्स भी सर्किट लिमिट की जानकारी प्रदान करते हैं।
