
कैश रिजर्व रेश्यो (Cash Reserve Ratio – CRR) वह न्यूनतम राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निर्धारित प्रतिशत के रूप में केंद्रीय बैंक (जैसे भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया – RBI) के पास रखना होता है। CRR एक महत्वपूर्ण मौद्रिक उपकरण है जिसका उपयोग केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए करता है। CRR वह प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक हिस्सा केंद्रीय बैंक के पास अनिवार्य रूप से नकदी के रूप में रखना होता है। यह राशि बैंकों द्वारा उधार देने के लिए उपलब्ध नहीं होती है।
हर बैंक को आरबीआई के पास कुछ नकदी रखनी होती है। यह रकम कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करती है कि सीआरआर – CRR यानी कैश रिजर्व रेश्यो कितना है अगर कैश रिजर्व रेश्यो ज्यादा होता है तो ज्यादा नकदी बाजार से निकलकर आरबीआई के पास चली जाती है। ऐसा होना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।
आरबीआई हर 2 महीने पर इन दरों में बदलाव पर विचार करता है। शेयर बाजार इस बैठक और इसके फैसलों पर नजर रखता है। रेट सेंसिटिव यानी ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले शेयर आरबीआई के इस फैसले से प्रभावित होते हैं, इनमें बैंकिंग सेक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, हाउसिंग फाइनेंस और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर शामिल हैं।
- उद्देश्य:
- मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना: CRR को समायोजित करके केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति को नियंत्रित कर सकता है।
- बैंकों की तरलता को नियंत्रित करना: CRR बैंकों की उधार देने की क्षमता को प्रभावित करता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली की समग्र तरलता को प्रबंधित किया जा सकता है।
- वित्तीय स्थिरता बनाए रखना: CRR का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि बैंकों के पास पर्याप्त नकदी हो और वे अपने जमाकर्ताओं के धन को सुरक्षित रख सकें।
- प्रभाव:
- बैंकों की उधार देने की क्षमता: CRR बढ़ाने से बैंकों के पास उपलब्ध नकदी की मात्रा कम हो जाती है, जिससे उनकी उधार देने की क्षमता घट जाती है। इससे बाजार में मुद्रा आपूर्ति घटती है।
- मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: CRR बढ़ाने से नकदी की आपूर्ति घटती है, जिससे मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, CRR घटाने से मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियाँ प्रोत्साहित होती हैं।
- बैंकिंग प्रणाली की तरलता: CRR का समायोजन बैंकों की समग्र तरलता को प्रभावित करता है, जिससे उनके पास जमाकर्ताओं के धन को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त नकदी होनी चाहिए।
- उदाहरण: मान लीजिए कि एक बैंक के पास कुल जमा राशि 100 करोड़ रुपये है और वर्तमान CRR 4% है। इस स्थिति में, बैंक को अपनी कुल जमा राशि का 4% यानी 4 करोड़ रुपये RBI के पास नकदी के रूप में रखना होगा। यदि RBI CRR को बढ़ाकर 5% कर देता है, तो बैंक को अब 5 करोड़ रुपये केंद्रीय बैंक के पास रखने होंगे, जिससे उसकी उधार देने की क्षमता कम हो जाएगी।
कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) का महत्व:
- मुद्रा आपूर्ति और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना: CRR का मुख्य उद्देश्य मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाना है।
- बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता: CRR यह सुनिश्चित करता है कि बैंकों के पास पर्याप्त नकदी हो ताकि वे जमाकर्ताओं के धन को सुरक्षित रख सकें और वित्तीय स्थिरता बनाए रख सकें।
- आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव: CRR का समायोजन आर्थिक गतिविधियों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है। इसे बढ़ाने से आर्थिक गतिविधियाँ धीमी हो सकती हैं, जबकि इसे घटाने से आर्थिक गतिविधियाँ प्रोत्साहित हो सकती हैं।
कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) केंद्रीय बैंक का एक महत्वपूर्ण मौद्रिक उपकरण है जिसका उपयोग मुद्रा आपूर्ति, मुद्रास्फीति और बैंकिंग प्रणाली की तरलता को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
