
फ्यूचर्स एक प्रकार का डेरिवेटिव अनुबंध है जो दो पक्षों के बीच भविष्य की किसी निश्चित तारीख पर और एक निश्चित कीमत पर एक संपत्ति की खरीद या बिक्री के लिए होता है। फ्यूचर्स अनुबंध मानकीकृत होते हैं और एक्सचेंजों पर कारोबार करते हैं, जिससे वे उच्च तरलता और पारदर्शिता प्रदान करते हैं।
- अंतर्निहित संपत्ति (Underlying Asset)
- वह संपत्ति जिसे फ्यूचर्स अनुबंध द्वारा दर्शाया जाता है, जैसे स्टॉक्स, बॉन्ड्स, कमोडिटी (जैसे सोना, तेल), करेंसी, या सूचकांक (जैसे Nifty, S&P 500)।
- अनुबंध आकार (Contract Size)
- प्रत्येक फ्यूचर्स अनुबंध के अंतर्गत कितनी मात्रा या इकाइयाँ होती हैं, जैसे 100 बैरल तेल, 50 टन सोना आदि।
- परिपक्वता तिथि (Maturity Date)
- वह तिथि जब अनुबंध समाप्त हो जाता है और निपटान होता है। इसे एक्सपायरी डेट भी कहा जाता है।
- हाजिर मूल्य (Spot Price)
- वर्तमान में अंतर्निहित संपत्ति की बाजार कीमत।
- फ्यूचर्स मूल्य (Futures Price)
- वह कीमत जिस पर फ्यूचर्स अनुबंध खरीदा या बेचा जाता है, जो हाजिर मूल्य और समय के अंतराल, ब्याज दरों, और अन्य कारकों पर आधारित होता है।
फ्यूचर्स के प्रकार
- कमोडिटी फ्यूचर्स (Commodity Futures)
- जैसे तेल, सोना, चांदी, कृषि उत्पाद (गेंहू, मक्का) आदि पर आधारित फ्यूचर्स।
- फाइनेंशियल फ्यूचर्स (Financial Futures)
- जैसे स्टॉक इंडेक्स, करेंसी, ब्याज दरें आदि पर आधारित फ्यूचर्स।
- इक्विटी फ्यूचर्स (Equity Futures)
- व्यक्तिगत स्टॉक्स पर आधारित फ्यूचर्स।
फ्यूचर्स कैसे काम करते हैं?
- मार्जिन और लीवरेज (Margin and Leverage)
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग में, निवेशक को केवल अनुबंध मूल्य का एक अंश (मार्जिन) का भुगतान करना होता है, जिससे लीवरेज प्राप्त होता है। लीवरेज निवेशक को छोटी पूंजी के साथ बड़े पोजीशन लेने की अनुमति देता है।
- मार्क-टू-मार्केट (Mark-to-Market)
- हर दिन, फ्यूचर्स अनुबंध की कीमत को अद्यतन किया जाता है और किसी भी लाभ या हानि को दैनिक रूप से खातों में समायोजित किया जाता है।
- निपटान (Settlement)
- फ्यूचर्स अनुबंध की परिपक्वता तिथि पर, निपटान या तो नकद में या अंतर्निहित संपत्ति की भौतिक डिलीवरी के माध्यम से होता है। अधिकांश फ्यूचर्स अनुबंध नकद में निपटाए जाते हैं।
फ्यूचर्स के लाभ
- जोखिम प्रबंधन (Risk Management)
- निवेशक अपने पोर्टफोलियो को मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए फ्यूचर्स का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक किसान अपनी फसल की कीमत को सुरक्षित करने के लिए फ्यूचर्स अनुबंध बेच सकता है।
- सट्टा लाभ (Speculative Profit)
- ट्रेडर्स बाजार की दिशा पर अनुमान लगाकर लाभ कमा सकते हैं। वे मूल्य वृद्धि की उम्मीद में खरीद सकते हैं या मूल्य गिरावट की उम्मीद में बेच सकते हैं।
- लिक्विडिटी (Liquidity)
- एक्सचेंज-ट्रेडेड फ्यूचर्स में उच्च तरलता होती है, जिससे निवेशकों को आसानी से प्रवेश और निकास की सुविधा मिलती है।
फ्यूचर्स के नुकसान
- उच्च जोखिम (High Risk)
- लीवरेज के कारण, फ्यूचर्स ट्रेडिंग में उच्च जोखिम होता है और छोटे मूल्य परिवर्तनों से बड़े नुकसान हो सकते हैं।
- जटिलता (Complexity)
- फ्यूचर्स अनुबंध और उनके मूल्य निर्धारण को समझना सभी निवेशकों के लिए आसान नहीं होता है।
- अस्थिरता (Volatility)
- फ्यूचर्स की कीमतें अत्यधिक अस्थिर हो सकती हैं, जिससे निवेशकों को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
फ्यूचर्स अनुबंध एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण है जो निवेशकों और ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधन, सट्टा लाभ, और बाजार दक्षता में सुधार के अवसर प्रदान करता है। हालांकि, इसकी जटिलता और उच्च जोखिम के कारण, निवेशकों को इसमें निवेश करने से पहले पूरी तरह से समझदारी और सावधानीपूर्वक योजना बनानी चाहिए। फ्यूचर्स का सही और उचित उपयोग निवेशकों को उनके निवेश उद्देश्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है।
