
राइट्स इश्यू (Rights Issue) एक वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयर खरीदने का अधिकार प्रदान करती है। यह आमतौर पर छूट पर दिया जाता है और एक निश्चित अनुपात में होता है, जैसे कि 1:2 का मतलब है कि हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर खरीदा जा सकता है। राइट्स इश्यू का मुख्य उद्देश्य पूंजी जुटाना होता है राइट्स इश्यू वह प्रक्रिया है जिसमें कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयर खरीदने का अधिकार देती है, अक्सर छूट पर और एक निश्चित समय सीमा के भीतर। ताकि कंपनी अपने विस्तार, परियोजनाओं, या अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सके। कंपनियां राइट्स इश्यू का इस्तेमाल पूंजी जुटाने के लिए करती हैं। अंतर बस इतना है कि जहाँ पब्लिक इश्यू नए निवेशक लाता है वहीं राइट्स इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों से ही पैसा जुटाया जाता है। एक तरह से आप इसे कुछ खास लोगों (शेयरधारकों) के लिए लाया गया पब्लिक इश्यू मान सकते हैं। राइट्स इश्यू का मतलब होता है कि कंपनी कुछ नया काम करने जा रही है। पुराने शेयरधारक अपने पास मौजूद शेयरों के अनुपात में राइट्स इश्यू से शेयर खरीद सकते हैं।
वैसे निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर मिल रही छूट नहीं देखनी चाहिए। ये बोनस शेयर नहीं है यहाँ आप शेयर के लिए पैसे दे रहे हैं और इसीलिए आपको पैसे तभी लगाने चाहिए जब आप कंपनी के भविष्य को ले कर संतुष्ट हों।
एक और बात, अगर राइट्स इश्यू के पहले बाजार में शेयर की कीमत गिर जाती है और राइट्स इश्यू की इश्यू कीमत से नीचे चली जाए तो शेयर को बाजार से खरीदना ज्यादा ठीक रहेगा।
- उद्देश्य:
- पूंजी जुटाना: कंपनी राइट्स इश्यू का उपयोग पूंजी जुटाने के लिए करती है ताकि वह अपने विस्तार, ऋण भुगतान, या अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सके।
- शेयरधारकों को अवसर: यह मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
- प्रक्रिया:
- घोषणा तिथि: जिस दिन कंपनी राइट्स इश्यू की घोषणा करती है।
- रिकॉर्ड तिथि: जिस दिन तक यह निर्धारित किया जाता है कि कौन से शेयरधारक राइट्स इश्यू के पात्र होंगे।
- ऑफर अनुपात: यह अनुपात बताता है कि मौजूदा शेयरधारकों को कितने नए शेयर खरीदने का अधिकार मिलेगा, जैसे 1:2, 1:3, आदि।
- ऑफर प्राइस: यह वह कीमत होती है जिस पर शेयरधारक नए शेयर खरीद सकते हैं, जो आमतौर पर बाजार मूल्य से कम होती है।
- समय सीमा: शेयरधारकों को नए शेयर खरीदने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाती है।
- लाभ और प्रभाव:
- शेयरधारकों का फायदा: शेयरधारक राइट्स इश्यू का उपयोग करके कम कीमत पर नए शेयर खरीद सकते हैं, जिससे उनकी कुल हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
- शेयरधारकों की हिस्सेदारी में बदलाव: यदि मौजूदा शेयरधारक राइट्स इश्यू का उपयोग नहीं करते, तो उनकी हिस्सेदारी अनुपातिक रूप से घट सकती है।
- नकदी प्रवाह: कंपनी के लिए राइट्स इश्यू एक महत्वपूर्ण नकदी प्रवाह का स्रोत हो सकता है।
- राइट्स इश्यू और बोनस इश्यू में अंतर:
- राइट्स इश्यू: मौजूदा शेयरधारकों को नए शेयर खरीदने का अधिकार मिलता है, लेकिन उन्हें इसके लिए भुगतान करना होता है।
- बोनस इश्यू: मौजूदा शेयरधारकों को मुफ्त में अतिरिक्त शेयर मिलते हैं।
उदाहरण:
मान लीजिए कि एक कंपनी के 1 लाख शेयर हैं और उसकी शेयर की कीमत 100 रुपये है। कंपनी 1:2 राइट्स इश्यू की घोषणा करती है और प्रत्येक नया शेयर 80 रुपये पर उपलब्ध कराती है। राइट्स इश्यू के बाद:
- मौजूदा शेयरधारक को हर 2 शेयरों पर 1 नया शेयर खरीदने का अधिकार मिलेगा।
- यदि सभी शेयरधारक इस अधिकार का उपयोग करते हैं, तो कंपनी 50,000 नए शेयर जारी करेगी और 40 लाख रुपये जुटाएगी (50,000 शेयर x 80 रुपये प्रति शेयर)।
राइट्स इश्यू एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण है जो कंपनियों को पूंजी जुटाने और मौजूदा शेयरधारकों को लाभ देने में मदद करता है। यह शेयरधारकों को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है और कंपनी को अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है।
