
शेयर बाय बैक (Buyback of Shares) एक वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें एक कंपनी अपने ही शेयरों को मौजूदा शेयरधारकों से वापस खरीदती है। यह अक्सर खुले बाजार या एक निश्चित कीमत पर शेयरधारकों से सीधे खरीद के माध्यम से किया जाता है। बाय बैक का मुख्य उद्देश्य कंपनी की पूंजी संरचना को बेहतर बनाना और शेयरधारकों के बीच विश्वास बढ़ाना होता है। बाय बैक में कंपनी अपने शेयर बाजार से खुद खरीदती है। इसे कंपनी के खुद में निवेश के तौर पर देखा जा सकता है। बाय बैक से बाजार में कंपनी के शेयरों की संख्या कम हो जाती है। इसे कारपोरेट फेरबदल का भी एक तरीका माना जाता है। बाय बैक की और भी बहुत सारी वजहें हो सकती हैंशेयर बाय बैक वह प्रक्रिया है जिसमें कंपनी अपने ही जारी किए गए शेयरों को पुनः खरीदती है। इसे “शेयर पुनर्खरीद” (Share Repurchase) भी कहा जाता है।
- उद्देश्य:
- शेयरधारक मूल्य बढ़ाना: बाय बैक से बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या कम हो जाती है, जिससे प्रति शेयर आय (EPS) और शेयर की कीमत बढ़ सकती है।
- अतिरिक्त नकदी का उपयोग: जब कंपनी के पास अतिरिक्त नकदी होती है और निवेश के लिए कोई बेहतर विकल्प नहीं होता, तो वह शेयर बाय बैक का सहारा ले सकती है।
- कंपनी पर विश्वास: बाय बैक यह संकेत देता है कि कंपनी का प्रबंधन अपने भविष्य पर विश्वास करता है और शेयर की मौजूदा कीमत को उचित या कम मानता है।
- वित्तीय संरचना में बदलाव: बाय बैक से कंपनी की इक्विटी घटती है और लिवरेज (debt-equity ratio) बढ़ सकती है, जो कभी-कभी वित्तीय रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
- प्रकार:
- खुले बाजार में बाय बैक: कंपनी खुले बाजार में शेयरों को खरीदती है।
- फिक्स्ड प्राइस टेंडर ऑफर: कंपनी एक निश्चित कीमत पर एक निश्चित संख्या में शेयर खरीदने की पेशकश करती है।
- डच ऑक्शन टेंडर ऑफर: कंपनी एक मूल्य सीमा निर्धारित करती है और शेयरधारक उस सीमा के भीतर अपनी कीमत पर शेयरों को टेंडर करते हैं।
- ऑफ मार्केट बाय बैक: कंपनी सीधे शेयरधारकों से बातचीत करके शेयर खरीदती है।
- प्रक्रिया:
- घोषणा: कंपनी बाय बैक योजना की घोषणा करती है और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी प्राप्त करती है।
- शर्तें: बाय बैक की शर्तें, जैसे कि कीमत, संख्या, और समय सीमा, निर्धारित की जाती हैं।
- नियामकीय अनुपालन: सभी नियामकीय आवश्यकताओं का पालन किया जाता है।
- शेयर खरीद: कंपनी शेयरधारकों से शेयर खरीदती है और उन्हें रद्द (cancel) कर देती है।
- लाभ और प्रभाव:
- शेयरधारकों का लाभ: बाय बैक से शेयरधारकों को अपने शेयर बेचने का एक अवसर मिलता है, अक्सर बाजार कीमत से अधिक पर।
- प्रति शेयर आय (EPS) में वृद्धि: शेयरों की संख्या कम होने से प्रति शेयर आय बढ़ती है।
- शेयर की कीमत पर प्रभाव: शेयर की कीमत आमतौर पर बाय बैक की घोषणा के बाद बढ़ जाती है।
- वित्तीय संरचना पर प्रभाव: बाय बैक से इक्विटी कम हो जाती है और वित्तीय लिवरेज बढ़ सकता है।
उदाहरण:
मान लीजिए कि एक कंपनी के 10 लाख शेयर हैं और प्रत्येक शेयर की कीमत 100 रुपये है। कंपनी ने 1 लाख शेयर 120 रुपये प्रति शेयर पर बाय बैक करने का निर्णय लिया। बाय बैक के बाद:
- कुल शेयरों की संख्या 9 लाख हो जाएगी।
- कंपनी को बाय बैक के लिए 1.2 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे (1 लाख शेयर x 120 रुपये प्रति शेयर)।
- प्रति शेयर आय (EPS) बढ़ सकती है क्योंकि कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है।
शेयर बाय बैक एक महत्वपूर्ण वित्तीय रणनीति है जो कंपनियों को अपनी पूंजी संरचना को अनुकूलित करने और शेयरधारक मूल्य बढ़ाने में मदद करती है। यह प्रक्रिया शेयरधारकों और कंपनी दोनों के लिए लाभदायक हो सकती है, बशर्ते इसे सही समय पर और सही उद्देश्यों के साथ लागू किया जाए।
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