
सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन चार्ज (STT) एक टैक्स है जो भारतीय स्टॉक मार्केट में होने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शंस पर लगाया जाता है। इसे भारतीय सरकार द्वारा लागू किया गया है STT का उद्देश्य स्टॉक मार्केट ट्रांजैक्शंस को ट्रैक करना और इनकम टैक्स रिटर्न में उनकी रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करना है।
- लागू होने वाली ट्रांजैक्शंस:
- इक्विटी शेयर (स्टॉक) की खरीद और बिक्री
- डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) की ट्रेडिंग
- इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स की खरीद और बिक्री
- चार्ज रेट्स:
- STT की दरें अलग-अलग प्रकार की ट्रांजैक्शंस के लिए अलग-अलग होती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख रेट्स दिए जा रहे हैं:
- इक्विटी शेयरों की खरीद: 0.1% (डिलीवरी बेस्ड)
- इक्विटी शेयरों की बिक्री: 0.1% (डिलीवरी बेस्ड)
- इक्विटी शेयरों की बिक्री: 0.025% (इंट्राडे)
- फ्यूचर्स की बिक्री: 0.01%
- ऑप्शंस की खरीद: 0.017% (एक्सरसाइज प्राइस पर)
- ऑप्शंस की बिक्री: 0.05%
- STT की दरें अलग-अलग प्रकार की ट्रांजैक्शंस के लिए अलग-अलग होती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख रेट्स दिए जा रहे हैं:
- भुगतान:
- STT का भुगतान ब्रोकर द्वारा कलेक्ट किया जाता है और सरकार को रेमिट किया जाता है।
- यह टैक्स ब्रोकरेज और अन्य ट्रांजैक्शन चार्जेस से अलग होता है।
- टैक्स बेनिफिट्स:
- STT के भुगतान के बाद, इक्विटी शेयरों और इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स से होने वाली आय पर कैपिटल गेन टैक्स का लाभ मिलता है।
- लोंग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर एक वर्ष के बाद 1,00,000 रुपये तक की आय टैक्स फ्री होती है और उससे ऊपर 10% टैक्स लगाया जाता है।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 15% टैक्स लगाया जाता है।
STT का उद्देश्य स्टॉक मार्केट में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना है और सरकार को स्टॉक मार्केट ट्रांजैक्शंस से राजस्व प्राप्त करना है। यह टैक्स न केवल वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देता है बल्कि टैक्स चोरी को भी कम करता है।
