
स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) एक वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को छोटे भागों में विभाजित करती है, जिससे प्रति शेयर की कीमत कम हो जाती है, लेकिन कुल बाजार पूंजीकरण समान रहता है। स्टॉक स्प्लिट का मुख्य उद्देश्य शेयर की कीमत को अधिक सुलभ बनाना और शेयरों की तरलता बढ़ाना होता है। शेयर स्प्लिट यानी शेयर का हिस्सों में बंटना बाजार की एक आम घटना है। इसमें एक शेयर कुछ शेयरों में बदल जाता है।
इसमें भी बोनस की तरह शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन निवेश की कीमत और मार्केट कैपिटलाइजेशन नहीं बदलता। स्टॉक स्प्लिट शेयर के फेस वैल्यू से जुड़ी होती है। स्टॉक स्प्लिट वह प्रक्रिया है जिसमें कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करती है।
उदाहरण के लिए, 2:1 स्टॉक स्प्लिट का मतलब है कि एक शेयर को दो शेयरों में विभाजित किया जाएगा।
- उद्देश्य:
- शेयर की कीमत को सुलभ बनाना: यदि किसी कंपनी के शेयर की कीमत बहुत अधिक हो जाती है, तो छोटे निवेशकों के लिए इसे खरीदना कठिन हो सकता है। स्टॉक स्प्लिट से शेयर की कीमत कम हो जाती है, जिससे यह अधिक सुलभ हो जाता है।
- तरलता बढ़ाना: स्टॉक स्प्लिट से शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे बाजार में उनकी तरलता बढ़ जाती है।
- निवेशकों का ध्यान आकर्षित करना: स्टॉक स्प्लिट आमतौर पर निवेशकों का ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि यह कंपनी की ग्रोथ और सकारात्मक प्रदर्शन का संकेत हो सकता है।
- प्रक्रिया:
- घोषणा तिथि: जिस दिन कंपनी स्टॉक स्प्लिट की घोषणा करती है।
- रिकॉर्ड तिथि: जिस दिन तक यह निर्धारित किया जाता है कि कौन से शेयरधारक स्प्लिट के पात्र होंगे।
- स्प्लिट अनुपात: यह अनुपात बताता है कि मौजूदा शेयरों को कितने भागों में विभाजित किया जाएगा, जैसे 2:1, 3:1, आदि।
- प्रभाव:
- शेयर की कीमत: स्टॉक स्प्लिट के बाद, प्रति शेयर की कीमत कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, यदि एक शेयर की कीमत 100 रुपये है और 2:1 स्टॉक स्प्लिट होता है, तो स्प्लिट के बाद प्रति शेयर की कीमत 50 रुपये हो जाएगी।
- शेयरधारकों की हिस्सेदारी: स्टॉक स्प्लिट से शेयरधारकों की कुल हिस्सेदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उनके पास अधिक शेयर होते हैं, लेकिन कुल मूल्य समान रहता है।
- बाजार पूंजीकरण: कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण समान रहता है, क्योंकि शेयरों की संख्या बढ़ती है लेकिन प्रत्येक शेयर की कीमत कम हो जाती है।
- स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू में अंतर:
- स्टॉक स्प्लिट: मौजूदा शेयरों को विभाजित किया जाता है, जिससे प्रति शेयर की कीमत कम हो जाती है लेकिन कुल शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।
- बोनस इश्यू: मौजूदा शेयरधारकों को अतिरिक्त मुफ्त शेयर दिए जाते हैं, जिससे कुल शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन प्रति शेयर की कीमत सीधे प्रभावित नहीं होती।
उदाहरण:
मान लीजिए कि एक कंपनी के शेयर की कीमत 1000 रुपये है और उसके 1 लाख शेयर हैं। कंपनी 2:1 स्टॉक स्प्लिट की घोषणा करती है। स्प्लिट के बाद:
- शेयर की कीमत 500 रुपये हो जाएगी।
- शेयरों की संख्या 2 लाख हो जाएगी।
- कुल बाजार पूंजीकरण (500 रुपये x 2 लाख शेयर) 10 करोड़ रुपये ही रहेगा।
स्टॉक स्प्लिट एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शेयरधारकों और निवेशकों के लिए कई फायदे ला सकती है। यह शेयर की कीमत को सुलभ बनाता है, तरलता बढ़ाता है, और कंपनी की वित्तीय स्थिरता और ग्रोथ को दर्शाता है।
