
थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI) एक महत्वपूर्ण आर्थिक सूचकांक है जो अर्थव्यवस्था में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में होने वाले परिवर्तनों को मापता है। इसे अक्सर मुद्रास्फीति के एक संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाली सामान्य प्रवृत्तियों को दर्शाता है। होलसेल प्राइस इंडेक्स कीमत में होलसेल यानी थोक स्तर पर होने वाले बदलाव को बताता है। यह उस कीमत को ट्रैक करता है जिस कीमत पर एक संस्था या कंपनी दूसरी संस्था या कंपनी को सामान बेचती है। यह इंडेक्स ग्राहक यानी कंज्यूमर को मिलने वाली कीमत को ट्रैक नहीं करता। होलसेल यानी थोक बाजार में इन्फ्लेशन यानी महंगाई नापने के लिए होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी डब्ल्यू पी आई (WPI) एक आसान तरीका है
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) वह सूचकांक है जो विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन को मापता है, जब वे थोक बाजार में बेची जाती हैं। इसमें कच्चे माल, मध्यवर्ती वस्तुएँ, और तैयार उत्पाद शामिल होते हैं।
- उद्देश्य:
- मुद्रास्फीति को मापना: WPI का मुख्य उद्देश्य मुद्रास्फीति को मापना और मूल्य स्थिरता को बनाए रखने में मदद करना है।
- नीति निर्माण: यह नीति निर्माताओं और केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक और राजकोषीय नीतियाँ तय करने में मदद करता है।
- आर्थिक विश्लेषण: WPI अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं को मूल्य प्रवृत्तियों और आर्थिक स्थिरता का विश्लेषण करने में सहायता करता है।
- मापने की विधि:
- बास्केट ऑफ गुड्स: WPI के तहत वस्तुओं की एक बास्केट तैयार की जाती है, जिसमें कृषि उत्पाद, खनिज और विनिर्मित वस्तुएं शामिल होती हैं।
- आधार वर्ष: WPI को मापने के लिए एक आधार वर्ष निर्धारित किया जाता है, और विभिन्न वर्षों की कीमतों की तुलना इस आधार वर्ष की कीमतों से की जाती है।
- वजन: बास्केट में शामिल प्रत्येक वस्तु को एक विशिष्ट वजन दिया जाता है, जो उसकी समग्र अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी को दर्शाता है।
- प्रभाव:
- मुद्रास्फीति पर प्रभाव: WPI में वृद्धि मुद्रास्फीति की ओर संकेत करती है, जबकि WPI में कमी का मतलब हो सकता है कि मूल्य स्थिर या गिर रहे हैं।
- नीति निर्धारण: WPI के आँकड़े केंद्रीय बैंक और सरकार को मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों को निर्धारित करने में मदद करते हैं।
- व्यापार और उद्योग पर प्रभाव: WPI व्यापारियों और उद्योगपतियों को मूल्य प्रवृत्तियों का पूर्वानुमान लगाने और उत्पादन व मूल्य निर्धारण की रणनीतियाँ विकसित करने में सहायता करता है।
- सीमाएँ:
- खुदरा मूल्य सूचकांक (CPI) के मुकाबले: WPI उपभोक्ता स्तर पर कीमतों को नहीं मापता, जबकि CPI उपभोक्ता बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को मापता है।
- सेवाओं का अभाव: WPI में मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों को मापा जाता है और सेवाओं की कीमतों को नहीं, जिससे व्यापक मूल्य प्रवृत्तियों का पूर्ण चित्र नहीं मिल पाता।
- स्थानीय और वैश्विक कारक: WPI पर स्थानीय और वैश्विक कारकों का प्रभाव हो सकता है, जैसे कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें।
उदाहरण:
मान लीजिए कि भारत में WPI के आधार वर्ष 2011-12 है और आधार वर्ष में WPI का मूल्य 100 है। यदि किसी विशिष्ट वर्ष में WPI का मूल्य 120 होता है, तो इसका मतलब है कि उस वर्ष थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतें आधार वर्ष की तुलना में 20% बढ़ गई हैं।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) एक महत्वपूर्ण आर्थिक सूचकांक है जो थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले परिवर्तनों को मापता है और मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियों को दर्शाता है। यह नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और व्यवसायों के लिए मूल्य प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने और आर्थिक नीतियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, इसे अन्य सूचकांकों, जैसे कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), के साथ मिलाकर देखना आवश्यक है ताकि व्यापक आर्थिक परिदृश्य का पूर्ण आकलन किया जा सके।
